साहित्य वर्षा Sahitya Varsha

मेरी सागर डायरी My Sagar Diary - डॉ. वर्षा सिंह

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Saturday, April 4, 2020

सालों बाद चिड़िया की चहचहाहट सुन रही हूं, देख रही हूं गिलहरियों का पेड़ पर चढ़ना - डॉ. वर्षा सिंह

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Dr. Varsha Singh       लॉकडाउन के इन दिनों के मेरे अनुभव को प्रकाशित किया है "नवदुनिया" ने... इस हेतु "नवदुनिया" क...
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Dr Varsha Singh
M.Sc. in Botany, Doctorate in Electro Homeopathy मैं यानी डॉ. वर्षा सिंह बचपन से लेखन कार्य कर रही हूं। मैं वनस्पति शास्त्र में एम.एस.सी हूं, इलेक्ट्रो होम्योपैथी में डॉक्टर हूं तथा मध्यप्रदेश पूर्वक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमि. सागर से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुकी हूं। मेरे छः ग़ज़ल संग्रह - वक्त पढ़ रहा है, सर्वहारा के लिए, हम जहां पर हैं, सच तो ये है, दिल बंजारा, ग़ज़ल जब बात करती है ; दो नवसाक्षरों हेतु पुस्तकें -पानी है अनमोल, कामकाजी महिलाओं के सुरक्षा अधिकार; एक आलोचना पुस्तक-हिन्दी ग़ज़ल: दशा और दिशा प्रकाशित हैं। मुझे मेरे सृजनात्मक लेखन हेतु केन्द्रीय हिन्दी परिषद, मध्य प्रदेश राज्य विद्युत मण्डल द्वारा ‘विशिष्ट हिन्दी सेवी सम्मान,हिन्दी परिषद् (बीना शाखा) मध्य प्रदेश राज्य विद्युत मण्डल द्वारा ‘हिन्दी शिरोमणि’ सम्मान,राजभाषा परिषद् भारतीय स्टेट बैंक, सागर शाखा द्वारा ‘उत्कृष्ट साहित्य सृजनकर्ता सम्मान’,हिंदी साहित्य सम्मेलन शाखा सागर द्वारा ‘सुधारानी जैन महिला साहित्यकार सम्मान’, बुन्देली लोक कला संस्था, झांसी, उत्तरप्रदेश द्वारा ‘गुरदी देवी सम्मान’ , शक्ति सम्मान आदि अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। मैं मानती हूं कि महिलाएं शक्ति का पर्याय हैं। उन्हें अपनी शक्ति को पहचान कर आत्मनिर्भर बनना चाहिए, ताकि देश और समाज के विकास में वे अपना पूर्ण योगदान दे सकें।
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