Friday, July 5, 2019

सागर : साहित्य एवं चिंतन 56 .... एक उदीयमान कवि प्रदीप पाण्डेय - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

       स्थानीय दैनिक समाचार पत्र "आचरण" में प्रकाशित मेरा कॉलम "सागर साहित्य एवं चिंतन " । जिसमें इस बार मैंने लिखा है मेरे शहर सागर के कवि प्रदीप पाण्डेय पर आलेख। पढ़िए और जानिए मेरे शहर के साहित्यिक परिवेश को ....

सागर : साहित्य एवं चिंतन

       एक उदीयमान कवि प्रदीप पाण्डेय
                                 - डॉ. वर्षा सिंह         
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परिचय :
नाम  :- प्रदीप पाण्डेय
जन्म :-  18 फरवरी 1975
जन्म स्थान :- सागर
माता-पिता :- श्रीमती सरस्वती देवी पाण्डेय एवं स्व. हरिनारायण पाण्डेय
शिक्षा  :- समाजशास्त्र एवं इतिहास में एम.ए., मास्टर डिप्लोमा इन सोशल वर्क ,एम.बी.ए. (एच.आर.),डाक्टरेट इन एन्त्रप्रान्यौरशिप।
लेखन विधा :- गद्य एवं पद्य।
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          सागर नगर में साहित्य के प्रति रुझान मानो यहां की हवा और पानी में घुले हुए हैं। इसीलिए विविध क्षेत्रों में प्रवृत्त व्यक्ति भी साहित्य सृजन की ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाते हैं। महाकवि पद्माकर की इस पुण्य भूमि में ऐसा होना स्वाभाविक है। राजीव नगर वार्ड के प्रसिद्ध कर्मकाण्डी विद्वान पं. हरिनारायण पाण्डेय एवं श्रीमती सरस्वती देवी पाण्डेय के यहां 18 फरवरी 1975 को जन्मे प्रदीप पाण्डेय यूं तो एक ‘मोटिवेशनल गुरु’ के रूप में युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं किंतु स्वयं वे साहित्यसृजन के प्रति पूर्णनिष्ठा से अभ्यासरत हैं। उनकी बाल्यावस्था परमधार्मिक वातावरण में व्यतीत हुई जिससे धर्म एवं दर्शन को उन्हें समझने का अवसर मिला। वस्तुतः उनके घर में पांडित्य कार्य पीढ़ियों से चला आ रहा है। किंतु प्रदीप पाण्डेय ने धार्मिक संकीर्णता के बजाय धर्म के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाया जिसकी प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता से मिली थी। प्रदीप पाण्डेय ने समाज शास्त्र ,इतिहास से एम.ए. किया। इसके साथ ही सोशल वर्क में डिप्लोमा किया। इसके बाद एम.बी.ए. (एच.आर.), डाक्टरेट इन एन्त्रप्रान्यौरशिप भी किया। प्रदीप पाण्डेय ने हमेशा इस बात की आकांक्षा रखी है कि युवावर्ग को उचित मार्गदर्शन मिल सके ताकि वे अपने जीवन में निराशा को दूर हटा कर सफलताएं प्राप्त कर सकें। इसी दिशा में पहले स्वयं को तैयार करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने ज्ञान एवं अनुभव के भंडार को बढ़ाते हुए जवाहरलाल नेहरू लीडरशिप इंस्टीट्यूट मे लीडरशिप मैनेजमेंट पर प्रशिक्षण कार्य ,आई आई एम-इंदौर “मैनेजरियल स्किलस“ पर प्रशिक्षण कार्य , लीड बैंक द्वारा संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन व प्रशिक्षण कार्य किया। आज वे युवाओं के लिए मोटीवेशनल स्पीकर एवं फ्रीलांस प्रशिक्षक है। उल्लेखनीय है कि सागर मे 2003 से 2008 प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु निःशुल्क कोचिंग ‘‘दी वे’’ संस्था द्वारा युवाओं की तैयारी कराई जिसके परिणामस्वरूप लगभग 3200 युवाओं का सरकारी सेवाओं मे चयन हुआ।
              सांस्कृतिक अभिरुचि से प्रेरित हो कर प्रदीप पाण्डेय नगर में लगभग 122 सांस्कृतिक आयोजन करा चुके हैं। “सिटी गाईड-2000’’, ‘‘शताब्दी परीक्षा विशेष’’ के प्रकाशन के अतिरिक्त सागर के सामाजिक मुद्दों पर चार डाक्युमेंट्री बना चुके हैं जिनमें सन् 2011 में बनाई गई डाक्युमेंट्री “तिल तिल मरती झील“ विशेष रूप से चर्चित रही। इन तमाम उपलब्धियों के साथ ही प्रदीप पाण्डेय काव्य के क्षेत्र में पूर्ण गंभीरता से अभ्यासरत हैं। साथ ही वे बताते हैं कि पत्र-पत्रिकाओं में अब तक उनके 42 लेखों का प्रकाशन हो चुका है तथा वे 100 से उपर कविताएं लिख चुके हैं। साहित्य के क्षेत्र में अपनी अब तक की उपलब्धियों का श्रेय वे अपने ‘मेंंटोर’ को देते हुए कहते हैं कि-‘‘ श्यामलम् संस्था के श्री उमाकांत मिश्र जी ने मुझे साहित्य के क्षेत्र में पहचान दिलवाई।’’

Sagar Sahitya Avam Chintan - Dr. Varsha Singh # Sahitya Varsha

              प्रदीप पाण्डेय अपने साहित्य सृजन के प्रति झुकाव के बारे में बताते हुए कहते हैं कि- ‘‘एक वक्ता को श्रोता होने के साथ अध्ययनशील होना, मै समझता हूँ प्रथम एवं अनिवार्य है। अतः मोटीवेशनल स्पीकर यदि लेखक हो तो लेखन बोलने की कला भी विकसित करता है यही सोचकर लिखने का प्रयास करता रहा। ये बात अलग है जो मन मे आता है वह लिख देता हूं किन्तु साहित्य की सीमाओं और साहित्य का ज्ञान  आज भी न्यून है। पत्रिकाओं और अखबारों मे प्रकाशन स्थानीय स्तर मतलब सागर में ही हुआ। लिखने का शौक बचपन से है कैसा जुड़ा ये कहना कठिन है। सन 2000 मे जब मेरी पत्रिका “सिटी गाईड “ का प्रकाशन हुआ तब उसमे मैंने एक लेख लिखा था “इश्क“। फिर एक कार्यक्रम हुआ 2003 रविन्द्र भवन में संगीत कार्यक्रम का नाम “ये लम्हे“ जिसका ब्रोशर मुझे लिखना था। जिसमें में मैने “ये लम्हे’’ कविता लिखी। कविता की प्रशंसा ने मुझे लिखने के लिये प्रेरणा दी और मेरी लिखने की गति बढ गई। फिर तो मैने युवाओं की सोच के अनुसार इश्क-मोहब्बत, देश, समाज और हास्य कविताओं के साथ आर्टिकल लिखना शुरु किए। मेरे आर्टीकल युवाओं को उत्साहवर्धन एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य  को लेकर ही लिखे गये। देशबंधु में 2016 से 2017 तक लगातार प्रकाशित हुए।’’
            अपने लेखन के प्रति साफगोई रखने वाले नवोदित कवि के रूप में सागर के साहित्याकाश में तेजी से प्रकाशित होने वाले कवि प्रदीप पाण्डेय की कविताओं में जीवन के विविध पक्ष उभर कर आते हैं। उनकी कविताओं में एक ऊर्जास्विता है। उदाहरण के लिए ‘‘वक़्त की ही तू तलाश है’ शीर्षक यह कविता की कुछ पंक्तियां देखिए -
कर इरादे ,नभ से ऊँचे
और ऊँची ,भर उडान ।
साध ले ,फिर लक्ष्य अपना
नये लक्ष्य को,कर संधान ।।
है बराबर; कौन तेरे ?
है कौन तुझसा ;साहसी ?
तू सजग है ,तू अमिट है
है कहाँ ,तुझसी शुचि ?
आजकर ,इसी वक्त कर
एक प्रण! कर ठान ले ।
है तू  ही सर्वज्ञ जग में
आज इतना जान ले ।।
उठ जिगर मे,भरकर आंधी
बैठा क्यों ,होकर उदास है
वक्त ने बोया है ,तुझको
वक्त की ही ,तू तलाश है ।।

वृक्षारोपण करते हुए मध्य में डॉ (सुश्री) शरद सिंह एवं दायें से प्रथम प्रदीप पाण्डेय


              ‘‘हुनर अपना भी आजमाऊंगा’’ शीर्षक कविता में आशावाद का एक सकारात्मक रूप दिखाई देता है जो कवि प्रदीप पाण्डेय द्वारा युवाओं को दिए जाने वाले संदेश की भांति है। इस कविता की कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं-
तीर है तुणीर में
समझूँ सबकी पीर मै
एक लक्ष्य, एक ध्येय
एक प्रण और प्राण है
एक शर मे
बिहंगम सी
खाई पाट जाऊंगा
आया हूँ तो ये तय
हुनर अपना भी आजमाऊंगा

            समाज और राजनीति की तत्कालीन दशाओं से हर युग में कवि प्रभावित हुए हैं। अव्यवस्थाओं के विरोध में जन्मे कटाक्ष का कविता में ढल कर सामने आना स्वाभाविक है। प्रदीप पाण्डेय ने भी अपनी कविता ‘‘बस मौन ही रहना’’ में भ्रष्टाचार एवं अव्यवस्थाओं पर कटाक्ष किया है। बानगी देखिए-
फिर सजेगी सेज मुहब्बत की
फिर चिताओं पे रुदन होगा ।
फिर चलेगी चर्चा हिंद के धर्म की
फिर अरमानों का हरण होगा ।
टपकेगा खून किसानों के माथे से
फिर सत्ता की, गली में जश्न होगा ।
फिर लुटेगी अस्मिता मासूम की
फिर न्याय ;अन्याय में दफ़न होगा ।
फिर जमी़र बिकेगा,ईमान बिकेंगें
चहुँओर नैतिकता का पतन होगा ।
हुआ - हुआ चिल्लायेंगे भेड़िये
फिर कहेंगे अमन ही अमन होगा ।
फिर चलेगी बात होंगी तकरीरें
मरेगा गाँधी और वेवा वतन होगा ।
रागों में ही चलेगी सियासत
सिपाही की मौत और निंदा का कफन होगा ।
बात मुहब्बत की होगी वार पीठ पे होगा
मंत्र में तुम मरो, गाली का भजन होगा ।
तुम मौन हो,बस मौन ही रहना
फिर उसी वेदी में तुम्हारा ही हवन होगा ।।

          प्रेम के प्रति समाज के दृष्टिकोण को बड़े ही सहजभाव से रखते हुए ‘‘मुहब्बत पूजा है’’ शीर्षक कविता में प्रदीप पाण्डेय प्रेम की श्रेष्ठता को इस प्रकार स्थापित करते हैं-
इबादत है/ प्रार्थना है
उपवास है/स्पंदन है
अद्भुत रहस्य है/सुन्दर अहसास है
बस लोग है!
करने नहीं देते ।

           यह सच है कि काव्यशिल्प के मर्मज्ञों को प्रदीप पाण्डेय के काव्यसृजन में अभी एक कच्चापन दिखाई देगा किंतु उनके सृजन की निरंतरता एवं उनके द्वारा गंभीरतापूर्वक किया जा रहा सृजन-अभ्यास इस बात की आश्वस्ति कराता है कि वर्तमान में उदीयमान कवि के रूप में दिखने वाले प्रदीप पाण्डेय एक दिन भावों के साथ-साथ शिल्प में भी अपनी मजबूत पकड़ बना लेंगे, क्यों कि उनमें काव्य की समझ और सृजन के प्रति लगन दोनों ही खूबियां मौजूद हैं। 
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( दैनिक, आचरण  दि. 05.07.2019)
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