Sunday, March 29, 2020

गुलाब कोठरी के अग्रलेख पर प्रतिक्रिया - डॉ. वर्षा सिंह

Dr. Varsha Singh

      गुलाब कोठारी भारत के एक सम्वेदनशील लेखक, पत्रकार तथा संपादक है एवं वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका के प्रधान सम्पादक है।  राजस्थान पत्रिका का सागर संस्करण पत्रिका के नाम से प्रकाशित होता है। कोठरी जी के लेखन के बारे में वेद विज्ञानी और जैन दर्शन के विद्वान दयानंद भार्गव विपुल का कथन है कि "जिस तरह गुलाब के कई रंग होते हैं, उसी तरह गुलाब कोठारी जब साधक होते हैं तो सफेद हो जाते हैं और जब बच्चों के साथ होते हैं तो गुलाबी और गुलाब के साथ कांटा भी होता है, इसलिए जब वे सम्पादकीय लिखते हैं तो कांटे की तरह काम करते हैं और किसी का भी फूला हुआ गुब्बारा पिचका देते हैं।"

गुलाब कोठरी

गुलाब कोठारी प्रत्येक सप्ताह लगभग 3-4 संपादकीय लिखते हैं जो कि अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक होती हैं। इन पर पाठकों की प्रतिक्रियाओं को अग्रलेख पर प्रतिक्रिया के अंतर्गत प्रकाशित किया जाता है।
www.patrika.com

      इस दफ़ा कोठरी जी ने दिनांक 28.03.2020 को प्रकाशित अपने संपादकीय यानी अग्रलेख में नवरात्रि और लॉकडाउन के परिपेक्ष्य में महिलाओं की परिवार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है। जिस पर मेरी यानी इस ब्लॉग की लेखिका डॉ. वर्षा सिंह एवं ख्यात लेखिका डॉ. (सुश्री) शरद सिंह की प्रतिक्रिया आज दिनांक 29.03.2020 को पत्रिका समाचारपत्र में प्रकाशित हुई है।
हार्दिक आभार पत्रिका 🙏


प्रस्तुत हैं उक्त प्रतिक्रियाएं....

स्त्रियों के प्रति सम्मान
कोठारी जी के लेखों में स्त्रियों के प्रति सम्मान की भावना सदैव परिलक्षित होती है । आज के अग्रलेख में भी कोठारी जी ने स्त्रियों के प्रति सम्मान की भावना को व्यक्त किया है । कोरोना के संक्रमण को रोकने के मद्देनजर वर्तमान में किया जा रहा लॉकडाउन लोगों को घर से बाहर न निकलने के लिए प्रेरित कर रहा है । घर में रहते हुए स्त्रियां गृह प्रबंधन का किस तरह बखूबी संचालन कर रही है इस बात को नवरात्रि की पूजा और आदिशक्ति दुर्गा की महिमा से जोड़ते हुए कोठारी जी ने स्त्रियों को देवी स्वरूपा अष्टभुजी दुर्गा का दर्जा दिया है , यह वास्तव में सराहनीय है। ऐसी विचारधारा स्त्रियों के प्रति लोगों के मन में सम्मान जगाने के लिए पूर्णता सक्षम है।
  -  डॉ. वर्षा सिंह, साहित्यकार, सागर ।
Dr. Varsha Singh

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  कोठारी जी को साधुवाद

आज अपने अग्रलेख में  गुलाब कोठारी जी ने  स्त्री की  सामाजिक एवं पारिवारिक महत्व को जिन शब्दों में व्याख्यायित किया है, वह स्त्री के प्रति एक काव्यात्मक आदरांजली के समान है। उनका यह आकलन अक्षरशः सत्य है कि स्त्री अपनी क्षमताओं को हर क्षेत्र में साबित कर चुकी है और आज कोरोना आपदा के समय लॉकडाउन को सफल बनाने में अपने परिवार के लिए पूर्ण रूप से समर्पित भाव से काम कर रही है। स्त्रियों की इस महत्ता को रेखांकित करने के लिए गुलाब कोठारी जी को साधुवाद!
 - डॉ (सुश्री) शरद सिंह, लेखिका, सागर म.प्र.
Dr. (Miss) Sharad Singh

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