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Wednesday, June 10, 2020

यूट्यूब पर साक्षात्कार... डॉ. वर्षा सिंह

प्रिय मित्रों,
         कृपया देखें और सुनें...मेरी कविताएं और मेरा साक्षात्कार 😊 जिसे 'प्रधाननामा' यूट्यूब चैनल के संचालक एवं सागर नगर के उत्साहित युवा यूट्यूबर वरुण प्रधान ने तैयार किया है। सागर के साहित्यकारों पर उनके द्वारा इन दिनों  प्रस्तुत "साहित्य सागर" श्रृंखला में देखिए  #PradhanNama के  #SahityaSagar में मेरा #Interview और सुनिए मेरी रचनाएं....
कृपया इस link पर जाएं....
Sahitya Sagar Ep 15 | Dr. Varsha Singh reciting her works | डॉ वर्षा सिंह..।। https://youtu.be/Wese01BF-NI via @YouTube


हार्दिक धन्यवाद प्रधाननामा 💐 #MyInterview #MyPoetry #MyGhazal #MyLife #MyWriteup #Sagar #Panna #DrVarshaSingh  #बुंदेलखंड #Bundelkhand #जयबुंदेली #जयबुंदेलखण्ड

Monday, April 6, 2020

डॉ. विद्यावती सिंह "मालविका" का साक्षात्कार..."लॉकडाउन मैंने अपने जीवन में पहली बार देखा" - डॉ. वर्षा सिंह


Dr. Varsha Singh

     मेरी माता जी डॉ. विद्यावती सिंह "मालविका" जो वरिष्ठ साहित्यकार हैं, वे चकित हैं लॉकडाउन पर, चिंतित हैं कोरोना संकट पर और ईश्वर से प्रार्थना किया करती हैं प्रत्येक व्यक्ति के स्वस्थ रहने के लिए।राजस्थान पत्रिका के सागर एडीशन "पत्रिका" द्वारा लिया गया उनका साक्षात्कार आज दि. 06.04.20 को "पत्रिका" में प्रकाशित हुआ है। जिसे आप भी पढ़ें...
हार्दिक आभार "पत्रिका" 🙏

मैं डॉ. वर्षा सिंह और मेरी माता जी डॉ. विद्यावती सिंह "मालविका"
 
       लॉकडाउन मैंने अपने जीवन में पहली बार देखा
                   - डॉ. विद्यावती सिंह "मालविका"
                      वरिष्ठ साहित्यकार, सागर

             मैंने अपने 90 वर्ष की आयु के दौरान अनेक बार कर्फ्यू की स्थिति देखी है।  ब्रिटिश काल में कई बार कर्फ्यू की स्थिति बन जाती थी और इसी प्रकार दंगे फसाद के समय भी कर्फ्यू लगाया जाता था  लेकिन लॉकडाउन मैंने अपने जीवन में पहली बार देखा है, जब मंदिर के पट भी बंद हैं और अस्पतालों में ओपीडी भी बंद कर दी गई है। पहले जब कर्फ्यू  लगाया जाता था तो उस कर्फ्यू के नियमों को तोड़ने वालों पर पुलिस के डंडे चलते थे या उन्हें जेल भेज दिया जाता था लेकिन आज अगर लॉकडाउन के नियमों का पालन नहीं करेंगे तो हम अपने ही स्वास्थ्य  ही नहीं अपने परिवार के अपने पड़ोसियों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाएंगे। यह जीवन और मृत्यु का सवाल है अतः हमें इसे गंभीरता से लेना होगा। कोरोना वायरस को किसी भी हाल में और फैलने. नहीं देना है।
          देश में लॉकडाउन पहली बार किया गया है तो  ऐसा संकट भी तो पहली बार आया है। कोरोना वायरस का असर इतना भीषण है कि पूरा देश, पूरी मानव जाति संकट में आ गई है। इस संकट से उबरने के लिए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जनता कर्फ्यू भी लगाया लेकिन दुख है कि लोगों ने उसका ढंग से पालन नहीं किया। कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए अत्यधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। कोरोना वायरस से सम्बन्धित लक्षण यदि किसी भी व्यक्ति में पाए जाते है तो उसे तुरंत नजदीकी हस्पताल में ले जाएं।
             प्रशासन की तरह मेरा भी सबसे अनुरोध है कि  नवरात्रि में घर में रह कर पूजा-पाठ करें। घर से बाहर बिलकुल नहीं निकलें। जो भी वस्तुएं घर में हों उन्हीं से नवरात्रि मनाएं। यह अच्छा है कि नवरात्रि में आयोजित होने वाले वार्षिक मेला, भजन संध्या, अखंड रामध्वनि आदि कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है। ईश्वर भक्ति से प्रसन्न होता है, जोकि घर में रह कर भी उतनी ही श्रद्धा से की जा सकती है। घर में रहें और प्रार्थना करें कि दुनिया में सभी मनुष्य स्वस्थ-प्रसन्न रहें। यह मानें कि  ईश्वर हमारी परीक्षा ले रहा है और हमें इस परीक्षा में उत्तीर्ण होना ही है।
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#Corona #PatrikaSagar
#SagarPatrika


Tuesday, February 11, 2020

एक मुलाकात शायर डॉ. मधुर नज़्मी से - डॉ. वर्षा सिंह


शे'र जब उभरते हैं सन्दली ख़यालों से
शाइरी महकती है तब नये सवालों से

अब अदब के गुलशन में फूल कम ही खिलते हैं
ज़ह्र फैलते हैं अब बे-अदब रिसालों में

छा रहा है सूरज पर अब्र का नया टुकड़ा
दूर कर न दे हमको तीरगी उजालों से

बेपरों की परवाज़ें बे-असर ही ठहरेंगी
पस्तियाँ ही आएँगी आपकी उछालों से

नफ़रतों का क़द शायद छोटा होने वाला है
लोग हो गए वाक़िफ़ रहबरों की चालों से

क्यों चला नहीं जाता, पाँव रुक गये हैं क्यों
हर जवाब मिल जाता पूछते जो छालों से

ऐ 'मधुर' अब उम्मीदें ख़ाक हो गयीं सारी
वक़्त का मछेरा ही घिर गया है जालों से

- मधुर नज़्मी

 विगत जनवरी 2020 में देश के प्रख्यात शायर मधुर नज़्मी जी का मोहम्मदाबाद गोहना, मऊ (उ.प्र.) से मेरे शहर सागर आए।  इस दौरान मैंने उन्हें अपने  पांचवें ग़ज़ल संग्रह "दिल बंजारा" की प्रति भेंट की तथा मैंने और मेरी बहन डॉ शरद सिंह ने उनसे साहित्यिक चर्चाएं कीं। उसी तारतम्य में मैंने उनका एक अनौपचारिक साक्षात्कार लिया जिसका मुख्य अंश यहां प्रस्तुत है -
*डॉ. वर्षा सिंह -* आप इतने बड़े ग़ज़लगो हैं, आप ग़ज़ल के वर्तमान परिदृश्य को कैसा पाते हैं?
*डॉ. मधुर नज़्मी-* ग़ज़ल का वर्तमान परिदृश्य चिन्ताजनक है क्योंकि सोशल मीडिया पर कथित शायरों की बाढ़ आ जाने से ग़ज़ल की गम्भीरता नष्ट हो रही है। आप लोगों जैसे शायरों की ग़ज़ल के प्रति प्रतिबद्धता यह भरोसा दिलाती है कि इस विधा को गम्भीरता से लेने वाले लोग अभी शेष हैं और ग़ज़ल की श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए कृतसंकल्प हैं।

*डॉ. वर्षा सिंह -* अक्सर यह सुनने में आता है कि साहित्य के प्रति अब लोगों मैं पहले जैसी रुचि नहीं रही। खुले मंच चुटकुलेबाजी का अड्डा बनते जा रहे हैं, आपका इस बारे में क्या कहना है?
*डॉ. मधुर नज़्मी-* आपका कहना सच है कि मंचों का स्तर अब पहले जैसा नहीं रहा। लेकिन मैं निराश नहीं हूं। साहित्य में बहुत ताकत होती है यदि  ईमानदारी से अपनाया जाए तो साहित्य सारी दुनिया से जोड़ने की ताकत रखता है। मैं मुफ़लिसी में पैदा हुआ लेकिन मेरी शायरी ने दस देशों में जा कर मुशायरे पढ़ने का मौका दिया।
*डॉ. वर्षा सिंह -* उर्दू ग़ज़ल और हिन्दी ग़ज़ल, इन दो भाषाई नामों पर भी अक्सर बहसें होती रहती हैं। क्या आप इस बंटवारे को उचित मानते हैं?
*डॉ. मधुर नज़्मी-* मैं ग़ज़ल विधा के संदर्भ में भाषाई विवाद को तरज़ीह नहीं देता हूं। ग़ज़ल तो वह है जो दिल से कही जाए और सुनने वाले के दिल को छू जाए।
*डॉ. वर्षा सिंह -* सागर आ कर आपको कैसा महसूस हो रहा है?
*डॉ. मधुर नज़्मी-* जी, सागर आ कर मुझे बहुत अच्छा लगा। सागर को मैं त्रिलोचन शास्त्री जी के सागर प्रवास के कारण जानता था, फिर आपके नाम से इसे जाना। यहां के लोग बहुत मिलनसार हैं।
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तीनबत्ती न्यूज़.कॉम
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#साक्षात्कार/डॉ #वर्षासिंह
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